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ਦੁਰ੍ਗਾਸਪ੍ਤਸ਼ਤੀ · ਅਧ੍ਯਾਯ 5

ਦੇਵ੍ਯਾ ਦੂਤਸਂਵਾਦ

Durga Saptashati Chapter 5 in Punjabi (Gurmukhi)

Devyā Dūta Saṃvāda · देवी-दूत संवाद · 76 श्लोक

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अध्याय सारांश

उत्तम चरित्र का प्रथम अध्याय (अधिष्ठात्री देवी महासरस्वती)। शुम्भ-निशुम्भ द्वारा स्वर्ग से वंचित देवता हिमालय जाकर प्रसिद्ध 'या देवी सर्वभूतेषु' स्तुति से देवी की आराधना करते हैं, उन्हें उस एक शक्ति के रूप में पूजते हैं जो समस्त प्राणियों में चेतना, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, शक्ति, क्षान्ति, शान्ति, श्रद्धा, लक्ष्मी, दया, माता और जगत् में व्याप्त चिति के रूप में स्थित हैं। पार्वती के शरीर से अम्बिका (कौशिकी) प्रकट होती हैं और पार्वती कृष्णवर्णा कालिका हो जाती हैं। दैत्य-सेवक चण्ड और मुण्ड उनके अनुपम सौंदर्य को देखकर शुम्भ को बताते हैं, जो उन्हें पाने के लिए दूत सुग्रीव को भेजता है। देवी मुस्कुराकर अपनी प्रतिज्ञा कहती हैं: जो युद्ध में उन्हें जीत ले वही उनका पति होगा — अतः शुम्भ या निशुम्भ पहले आकर उन्हें जीतें।

ध्यान

ਘਣ੍ਟਾਸ਼ੂਲਹਲਾਨਿ ਸ਼ਙ੍ਖਮੁਸਲੇ ਚਕ੍ਰਂ ਧਨੁਃ ਸਾਯਕਂ ਹਸ੍ਤਾਬ੍ਜੈਰ੍ਦਧਤੀਂ ਘਨਾਨ੍ਤਵਿਲਸਚ੍ਛੀਤਾਂਸ਼ੁਤੁਲ੍ਯਪ੍ਰਭਾਮ੍ ਗੌਰੀਦੇਹਸਮੁਦ੍ਭਵਾਂ ਤ੍ਰਿਜਗਤਾਮਾਧਾਰਭੂਤਾਂ ਮਹਾ- ਪੂਰ੍ਵਾਮਤ੍ਰ ਸਰਸ੍ਵਤੀਮਨੁਭਜੇ ਸ਼ੁਮ੍ਭਾਦਿਦੈਤ੍ਯਾਰ੍ਦਿਨੀਮ੍

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ਕ੍ਲੀਂ ऋषਿਰੁਵਾਚ ਪੁਰਾ ਸ਼ੁਮ੍ਭਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਾਭ੍ਯਾਮਸੁਰਾਭ੍ਯਾਂ ਸ਼ਚੀਪਤੇਃ ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯਂ ਯਜ੍ਞਭਾਗਾਸ਼੍ਚ ਹृਤਾ ਮਦਬਲਾਸ਼੍ਰਯਾਤ੍

oṃ klīṃ ṛṣiruvāca purā śumbhaniśumbhābhyāmasurābhyāṃ śacīpateḥ trailokyaṃ yajñabhāgāśca hṛtā madabalāśrayāt

अर्थ(ॐ क्लीं। ऋषि बोले —) प्राचीन काल में शुम्भ और निशुम्भ नामक दो असुरों ने अपने मद और बल के आश्रय से तीनों लोक तथा इन्द्र (शचीपति) के यज्ञभाग छीन लिए।

ਤਾਵੇਵ ਸੂਰ੍ਯਤਾਂ ਤਦ੍ਵਦਧਿਕਾਰਂ ਤਥੈਨ੍ਦਵਮ੍ ਕੌਬੇਰਮਥ ਯਾਮ੍ਯਂ ਚਕ੍ਰਾਤੇ ਵਰੁਣਸ੍ਯ

tāveva sūryatāṃ tadvadadhikāraṃ tathaindavam kauberamatha yāmyaṃ ca cakrāte varuṇasya ca

अर्थउन दोनों ने ही सूर्य का पद, तथा चन्द्र, कुबेर, यम और वरुण के अधिकार भी अपने हाथ में ले लिए।

ਤਾਵੇਵ ਪਵਨਰ੍ਦ੍ਧਿਂ ਚਕ੍ਰਤੁਰ੍ਵਹ੍ਨਿਕਰ੍ਮ ਤਤੋ ਦੇਵਾ ਵਿਨਿਰ੍ਧੂਤਾ ਭ੍ਰष੍ਟਰਾਜ੍ਯਾਃ ਪਰਾਜਿਤਾਃ

tāveva pavanarddhiṃ ca cakraturvahnikarma ca tato devā vinirdhūtā bhraṣṭarājyāḥ parājitāḥ

अर्थउन्होंने ही वायु की समृद्धि और अग्नि का कार्य भी हथिया लिया। तब देवता राज्य से भ्रष्ट, पराजित और बहिष्कृत हो गए।

ਹृਤਾਧਿਕਾਰਾਸ੍ਤ੍ਰਿਦਸ਼ਾਸ੍ਤਾਭ੍ਯਾਂ ਸਰ੍ਵੇ ਨਿਰਾਕृਤਾਃ ਮਹਾਸੁਰਾਭ੍ਯਾਂ ਤਾਂ ਦੇਵੀਂ ਸਂਸ੍ਮਰਨ੍ਤ੍ਯਪਰਾਜਿਤਾਮ੍

hṛtādhikārāstridaśāstābhyāṃ sarve nirākṛtāḥ mahāsurābhyāṃ tāṃ devīṃ saṃsmarantyaparājitām

अर्थउन दोनों महान् असुरों द्वारा अधिकार छीने जाकर बहिष्कृत समस्त देवता उस अपराजिता देवी का स्मरण करने लगे:

ਤਯਾਸ੍ਮਾਕਂ ਵਰੋ ਦਤ੍ਤੋ ਯਥਾਪਤ੍ਸੁ ਸ੍ਮृਤਾਖਿਲਾਃ ਭਵਤਾਂ ਨਾਸ਼ਯਿष੍ਯਾਮਿ ਤਤ੍ਕ੍षਣਾਤ੍ਪਰਮਾਪਦਃ

tayāsmākaṃ varo datto yathāpatsu smṛtākhilāḥ bhavatāṃ nāśayiṣyāmi tatkṣaṇātparamāpadaḥ

अर्थ'उन्होंने हमें यह वर दिया था — "जब-जब विपत्ति में तुम सब मेरा स्मरण करोगे, उसी क्षण मैं तुम्हारी घोर विपत्तियों का नाश कर दूँगी।"'

ਇਤਿ ਕृਤ੍ਵਾ ਮਤਿਂ ਦੇਵਾ ਹਿਮਵਨ੍ਤਂ ਨਗੇਸ਼੍ਵਰਮ੍ ਜਗ੍ਮੁਸ੍ਤਤ੍ਰ ਤਤੋ ਦੇਵੀਂ ਵਿष੍ਣੁਮਾਯਾਂ ਪ੍ਰਤੁष੍ਟੁਵੁਃ

iti kṛtvā matiṃ devā himavantaṃ nageśvaram jagmustatra tato devīṃ viṣṇumāyāṃ pratuṣṭuvuḥ

अर्थऐसा निश्चय करके देवता पर्वतराज हिमवान् के पास गए, और वहाँ विष्णुमाया उस देवी की स्तुति करने लगे।

ਦੇਵਾ ਊਚੁਃ ਨਮੋ ਦੇਵ੍ਯੈ ਮਹਾਦੇਵ੍ਯੈ ਸ਼ਿਵਾਯੈ ਸਤਤਂ ਨਮਃ ਨਮਃ ਪ੍ਰਕृਤ੍ਯੈ ਭਦ੍ਰਾਯੈ ਨਿਯਤਾਃ ਪ੍ਰਣਤਾਃ ਸ੍ਮ ਤਾਮ੍

devā ūcuḥ namo devyai mahādevyai śivāyai satataṃ namaḥ namaḥ prakṛtyai bhadrāyai niyatāḥ praṇatāḥ sma tām

अर्थ(देवता बोले —) देवी को, महादेवी को, शिवा को निरन्तर नमस्कार; प्रकृति को, भद्रा को नमस्कार — हम नियमपूर्वक उन्हें प्रणाम करते हैं।

ਰੌਦ੍ਰਾਯੈ ਨਮੋ ਨਿਤ੍ਯਾਯੈ ਗੌਰ੍ਯੈ ਧਾਤ੍ਰ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ ਜ੍ਯੋਤ੍ਸ੍ਨਾਯੈ ਚੇਨ੍ਦੁਰੂਪਿਣ੍ਯੈ ਸੁਖਾਯੈ ਸਤਤਂ ਨਮਃ

raudrāyai namo nityāyai gauryai dhātryai namo namaḥ jyotsnāyai cendurūpiṇyai sukhāyai satataṃ namaḥ

अर्थरौद्री को, नित्या को, गौरी को, धात्री को नमस्कार-नमस्कार; ज्योत्स्ना (चाँदनी) को और चन्द्ररूपिणी को, सुख-स्वरूपा को निरन्तर नमस्कार।

ਕਲ੍ਯਾਣ੍ਯੈ ਪ੍ਰਣਤਾਂ ਵृਦ੍ਧ੍ਯੈ ਸਿਦ੍ਧ੍ਯੈ ਕੁਰ੍ਮੋ ਨਮੋ ਨਮਃ ਨੈਰृਤ੍ਯੈ ਭੂਭृਤਾਂ ਲਕ੍ष੍ਮ੍ਯੈ ਸ਼ਰ੍ਵਾਣ੍ਯੈ ਤੇ ਨਮੋ ਨਮਃ

kalyāṇyai praṇatāṃ vṛddhyai siddhyai kurmo namo namaḥ nairṛtyai bhūbhṛtāṃ lakṣmyai śarvāṇyai te namo namaḥ

अर्थकल्याणी को, प्रणत जनों की वृद्धिरूपा को, सिद्धि को हम नमस्कार करते हैं; नैऋती को, राजाओं की लक्ष्मी को, शर्वाणी को आपको नमस्कार-नमस्कार।

ਦੁਰ੍ਗਾਯੈ ਦੁਰ੍ਗਪਾਰਾਯੈ ਸਾਰਾਯੈ ਸਰ੍ਵਕਾਰਿਣ੍ਯੈ ਖ੍ਯਾਤ੍ਯੈ ਤਥੈਵ ਕृष੍ਣਾਯੈ ਧੂਮ੍ਰਾਯੈ ਸਤਤਂ ਨਮਃ

durgāyai durgapārāyai sārāyai sarvakāriṇyai khyātyai tathaiva kṛṣṇāyai dhūmrāyai satataṃ namaḥ

अर्थदुर्गा को, दुर्गम (संसार) से पार उतारने वाली को, सार-स्वरूपा को, सब कुछ करने वाली को, ख्याति को, तथा कृष्णा और धूम्रा को निरन्तर नमस्कार।

ਅਤਿਸੌਮ੍ਯਾਤਿਰੌਦ੍ਰਾਯੈ ਨਤਾਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ ਨਮੋ ਜਗਤ੍ਪ੍ਰਤਿष੍ਠਾਯੈ ਦੇਵ੍ਯੈ ਕृਤ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

atisaumyātiraudrāyai natāstasyai namo namaḥ namo jagatpratiṣṭhāyai devyai kṛtyai namo namaḥ

अर्थअत्यन्त सौम्य और अत्यन्त रौद्र रूप वाली को हम नमस्कार करते हैं, उन्हें नमस्कार-नमस्कार; जगत् की प्रतिष्ठा-स्वरूपा कृति-रूप देवी को नमस्कार-नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਵਿष੍ਣੁਮਾਯੇਤਿ ਸ਼ਬ੍ਦਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu viṣṇumāyeti śabditā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में 'विष्णुमाया' नाम से कही जाती हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਚੇਤਨੇਤ੍ਯਭਿਧੀਯਤੇ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu cetanetyabhidhīyate namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में 'चेतना' कहलाती हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਬੁਦ੍ਧਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu buddhirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में बुद्धि रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਨਿਦ੍ਰਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu nidrārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में निद्रा रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਕ੍षੁਧਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu kṣudhārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में क्षुधा रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਛਾਯਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu chāyārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में छाया रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਸ਼ਕ੍ਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu śaktirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਤृष੍ਣਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu tṛṣṇārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में तृष्णा रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਕ੍षਾਨ੍ਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu kṣāntirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में क्षान्ति (क्षमा) रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਜਾਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu jātirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में जाति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਲਜ੍ਜਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu lajjārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में लज्जा रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਸ਼ਾਨ੍ਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu śāntirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में शान्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਸ਼੍ਰਦ੍ਧਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu śraddhārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में श्रद्धा रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਕਾਨ੍ਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu kāntirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में कान्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਲਕ੍ष੍ਮੀਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu lakṣmīrūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में लक्ष्मी रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਵृਤ੍ਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu vṛttirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में वृत्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਸ੍ਮृਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu smṛtirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में स्मृति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਦਯਾਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu dayārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में दया रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਤੁष੍ਟਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu tuṣṭirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में तुष्टि रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਮਾਤृਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu mātṛrūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में मातृ (माता) रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਯਾ ਦੇਵੀ ਸਰ੍ਵਭੂਤੇषੁ ਭ੍ਰਾਨ੍ਤਿਰੂਪੇਣ ਸਂਸ੍ਥਿਤਾ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

yā devī sarvabhūteṣu bhrāntirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों में भ्रान्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਇਨ੍ਦ੍ਰਿਯਾਣਾਮਧਿष੍ਠਾਤ੍ਰੀ ਭੂਤਾਨਾਂ ਚਾਖਿਲੇषੁ ਯਾ ਭੂਤੇषੁ ਸਤਤਂ ਤਸ੍ਯੈ ਵ੍ਯਾਪ੍ਤ੍ਯੈ ਦੇਵ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

indriyāṇāmadhiṣṭhātrī bhūtānāṃ cākhileṣu yā bhūteṣu satataṃ tasyai vyāptyai devyai namo namaḥ

अर्थजो देवी समस्त प्राणियों की इन्द्रियों की अधिष्ठात्री हैं और सम्पूर्ण भूतों में निरन्तर व्याप्त रहने वाली हैं, उस व्याप्ति-रूपा देवी को नमस्कार-नमस्कार।

ਚਿਤਿਰੂਪੇਣ ਯਾ ਕृਤ੍ਸ੍ਨਮੇਤਦ੍ ਵ੍ਯਾਪ੍ਯ ਸ੍ਥਿਤਾ ਜਗਤ੍ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮਸ੍ਤਸ੍ਯੈ ਨਮੋ ਨਮਃ

citirūpeṇa yā kṛtsnametad vyāpya sthitā jagat namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थजो देवी चिति (चैतन्य) रूप से इस सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त करके स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

ਸ੍ਤੁਤਾ ਸੁਰੈਃ ਪੂਰ੍ਵਮਭੀष੍ਟਸਂਸ਼੍ਰਯਾ- ਤ੍ਤਥਾ ਸੁਰੇਨ੍ਦ੍ਰੇਣ ਦਿਨੇषੁ ਸੇਵਿਤਾ ਕਰੋਤੁ ਸਾ ਨਃ ਸ਼ੁਭਹੇਤੁਰੀਸ਼੍ਵਰੀ ਸ਼ੁਭਾਨਿ ਭਦ੍ਰਾਣ੍ਯਭਿਹਨ੍ਤੁ ਚਾਪਦਃ

stutā suraiḥ pūrvamabhīṣṭasaṃśrayā- ttathā surendreṇa dineṣu sevitā karotu sā naḥ śubhaheturīśvarī śubhāni bhadrāṇyabhihantu cāpadaḥ

अर्थजो पूर्वकाल में अभीष्ट की प्राप्ति के लिए देवताओं द्वारा स्तुति की गईं और इन्द्र द्वारा प्रतिदिन सेवित रहीं — वे कल्याण की हेतु ईश्वरी हमारा शुभ व मंगल करें और विपत्तियों का नाश करें।

ਯਾ ਸਾਮ੍ਪ੍ਰਤਂ ਚੋਦ੍ਧਤਦੈਤ੍ਯਤਾਪਿਤੈ- ਰਸ੍ਮਾਭਿਰੀਸ਼ਾ ਸੁਰੈਰ੍ਨਮਸ੍ਯਤੇ ਯਾ ਸ੍ਮृਤਾ ਤਤ੍ਕ੍षਣਮੇਵ ਹਨ੍ਤਿ ਨਃ ਸਰ੍ਵਾਪਦੋ ਭਕ੍ਤਿਵਿਨਮ੍ਰਮੂਰ੍ਤਿਭਿਃ

yā sāmprataṃ coddhatadaityatāpitai- rasmābhirīśā ca surairnamasyate yā ca smṛtā tatkṣaṇameva hanti naḥ sarvāpado bhaktivinamramūrtibhiḥ

अर्थऔर जो ईश्वरी इस समय उद्धत दैत्यों से पीड़ित हम तथा भक्ति से विनम्र देवताओं द्वारा वन्दित हैं — जो स्मरण किए जाने पर उसी क्षण हमारी समस्त विपत्तियों का नाश कर देती हैं।

ऋषਿਰੁਵਾਚ ਏਵਂ ਸ੍ਤਵਾਭਿਯੁਕ੍ਤਾਨਾਂ ਦੇਵਾਨਾਂ ਤਤ੍ਰ ਪਾਰ੍ਵਤੀ ਸ੍ਨਾਤੁਮਭ੍ਯਾਯਯੌ ਤੋਯੇ ਜਾਹ੍ਨਵ੍ਯਾ ਨृਪਨਨ੍ਦਨ

ṛṣiruvāca evaṃ stavābhiyuktānāṃ devānāṃ tatra pārvatī snātumabhyāyayau toye jāhnavyā nṛpanandana

अर्थ(ऋषि बोले —) हे राजकुमार! जब देवता इस प्रकार स्तुति में लगे थे, तभी पार्वती वहाँ गंगा (जाह्नवी) के जल में स्नान करने आईं।

ਸਾਬ੍ਰਵੀਤ੍ਤਾਨ੍ ਸੁਰਾਨ੍ ਸੁਭ੍ਰੂਰ੍ਭਵਦ੍ਭਿਃ ਸ੍ਤੂਯਤੇऽਤ੍ਰ ਕਾ ਸ਼ਰੀਰਕੋਸ਼ਤਸ਼੍ਚਾਸ੍ਯਾਃ ਸਮੁਦ੍ਭੂਤਾਬ੍ਰਵੀਚ੍ਛਿਵਾ

sābravīttān surān subhrūrbhavadbhiḥ stūyate'tra kā śarīrakośataścāsyāḥ samudbhūtābravīcchivā

अर्थउन सुन्दर भौंहों वाली ने उन देवताओं से पूछा: 'यहाँ आप किसकी स्तुति कर रहे हैं?' तभी उन्हीं (पार्वती) के शरीर-कोश से प्रकट होकर शिवा (अम्बिका) बोलीं:

ਸ੍ਤੋਤ੍ਰਂ ਮਮੈਤਤ੍ਕ੍ਰਿਯਤੇ ਸ਼ੁਮ੍ਭਦੈਤ੍ਯਨਿਰਾਕृਤੈਃ ਦੇਵੈਃ ਸਮੇਤੈਃ ਸਮਰੇ ਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭੇਨ ਪਰਾਜਿਤੈਃ

stotraṃ mamaitatkriyate śumbhadaityanirākṛtaiḥ devaiḥ sametaiḥ samare niśumbhena parājitaiḥ

अर्थ'शुम्भ दैत्य द्वारा तिरस्कृत और निशुम्भ द्वारा युद्ध में पराजित एकत्रित देवताओं द्वारा यह स्तोत्र मेरे लिए किया जा रहा है।'

ਸ਼ਰੀਰਕੋਸ਼ਾਦ੍ਯਤ੍ਤਸ੍ਯਾਃ ਪਾਰ੍ਵਤ੍ਯਾ ਨਿਃਸृਤਾਮ੍ਬਿਕਾ ਕੌਸ਼ਿਕੀਤਿ ਸਮਸ੍ਤੇषੁ ਤਤੋ ਲੋਕੇषੁ ਗੀਯਤੇ

śarīrakośādyattasyāḥ pārvatyā niḥsṛtāmbikā kauśikīti samasteṣu tato lokeṣu gīyate

अर्थचूँकि अम्बिका पार्वती के शरीर-कोश से निकलीं, इसीलिए समस्त लोकों में वे 'कौशिकी' नाम से गाई जाती हैं।

ਤਸ੍ਯਾਂ ਵਿਨਿਰ੍ਗਤਾਯਾਂ ਤੁ ਕृष੍ਣਾਭੂਤ੍ਸਾਪਿ ਪਾਰ੍ਵਤੀ ਕਾਲਿਕੇਤਿ ਸਮਾਖ੍ਯਾਤਾ ਹਿਮਾਚਲਕृਤਾਸ਼੍ਰਯਾ

tasyāṃ vinirgatāyāṃ tu kṛṣṇābhūtsāpi pārvatī kāliketi samākhyātā himācalakṛtāśrayā

अर्थउनके निकल जाने पर पार्वती भी कृष्णवर्णा हो गईं और 'कालिका' नाम से विख्यात होकर हिमालय पर निवास करने लगीं।

ਤਤੋऽਮ੍ਬਿਕਾਂ ਪਰਂ ਰੂਪਂ ਬਿਭ੍ਰਾਣਾਂ ਸੁਮਨੋਹਰਮ੍ ਦਦਰ੍ਸ਼ ਚਣ੍ਡੋ ਮੁਣ੍ਡਸ਼੍ਚ ਭृਤ੍ਯੌ ਸ਼ੁਮ੍ਭਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਯੋਃ

tato'mbikāṃ paraṃ rūpaṃ bibhrāṇāṃ sumanoharam dadarśa caṇḍo muṇḍaśca bhṛtyau śumbhaniśumbhayoḥ

अर्थतब शुम्भ-निशुम्भ के दो सेवक चण्ड और मुण्ड ने उस परम मनोहर रूप को धारण किए हुए अम्बिका को देखा।

ਤਾਭ੍ਯਾਂ ਸ਼ੁਮ੍ਭਾਯ ਚਾਖ੍ਯਾਤਾ ਸਾਤੀਵ ਸੁਮਨੋਹਰਾ ਕਾਪ੍ਯਾਸ੍ਤੇ ਸ੍ਤ੍ਰੀ ਮਹਾਰਾਜ ਭਾਸਯਨ੍ਤੀ ਹਿਮਾਚਲਮ੍

tābhyāṃ śumbhāya cākhyātā sātīva sumanoharā kāpyāste strī mahārāja bhāsayantī himācalam

अर्थउन दोनों ने शुम्भ से कहा: 'हे महाराज! कोई अत्यन्त मनोहर स्त्री वहाँ रह रही है, जो हिमालय को प्रकाशित कर रही है।

ਨੈਵ ਤਾਦृਕ੍ ਕ੍ਵਚਿਦ੍ਰੂਪਂ ਦृष੍ਟਂ ਕੇਨਚਿਦੁਤ੍ਤਮਮ੍ ਜ੍ਞਾਯਤਾਂ ਕਾਪ੍ਯਸੌ ਦੇਵੀ ਗृਹ੍ਯਤਾਂ ਚਾਸੁਰੇਸ਼੍ਵਰ

naiva tādṛk kvacidrūpaṃ dṛṣṭaṃ kenaciduttamam jñāyatāṃ kāpyasau devī gṛhyatāṃ cāsureśvara

अर्थवैसा उत्तम रूप कभी किसी ने कहीं नहीं देखा। हे असुरेश्वर! पता लगाइए कि वह देवी कौन है, और उसे ग्रहण कर लीजिए।

ਸ੍ਤ੍ਰੀਰਤ੍ਨਮਤਿਚਾਰ੍ਵਙ੍ਗੀ ਦ੍ਯੋਤਯਨ੍ਤੀ ਦਿਸ਼ਸ੍ਤ੍ਵਿषਾ ਸਾ ਤੁ ਤਿष੍ਠਤਿ ਦੈਤ੍ਯੇਨ੍ਦ੍ਰ ਤਾਂ ਭਵਾਨ੍ ਦ੍ਰष੍ਟੁਮਰ੍ਹਤਿ

strīratnamaticārvaṅgī dyotayantī diśastviṣā sā tu tiṣṭhati daityendra tāṃ bhavān draṣṭumarhati

अर्थअत्यन्त सुन्दर अंगों वाली, अपनी कांति से दिशाओं को प्रकाशित करती वह स्त्री-रत्न वहाँ विराजमान है, हे दैत्येन्द्र! आप उसे देखने योग्य हैं।

ਯਾਨਿ ਰਤ੍ਨਾਨਿ ਮਣਯੋ ਗਜਾਸ਼੍ਵਾਦੀਨਿ ਵੈ ਪ੍ਰਭੋ ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯੇ ਤੁ ਸਮਸ੍ਤਾਨਿ ਸਾਮ੍ਪ੍ਰਤਂ ਭਾਨ੍ਤਿ ਤੇ ਗृਹੇ

yāni ratnāni maṇayo gajāśvādīni vai prabho trailokye tu samastāni sāmprataṃ bhānti te gṛhe

अर्थहे प्रभो! तीनों लोकों में जो भी रत्न, मणियाँ, हाथी-घोड़े आदि हैं, वे सब इस समय आपके घर में सुशोभित हैं।

ਐਰਾਵਤਃ ਸਮਾਨੀਤੋ ਗਜਰਤ੍ਨਂ ਪੁਰਨ੍ਦਰਾਤ੍ ਪਾਰਿਜਾਤਤਰੁਸ਼੍ਚਾਯਂ ਤਥੈਵੋਚ੍ਚੈਃਸ਼੍ਰਵਾ ਹਯਃ

airāvataḥ samānīto gajaratnaṃ purandarāt pārijātataruścāyaṃ tathaivoccaiḥśravā hayaḥ

अर्थहाथियों में रत्न ऐरावत इन्द्र से लाया गया, यह पारिजात वृक्ष भी, और वैसे ही उच्चैःश्रवा घोड़ा।

ਵਿਮਾਨਂ ਹਂਸਸਂਯੁਕ੍ਤਮੇਤਤ੍ਤਿष੍ਠਤਿ ਤੇऽਙ੍ਗਣੇ ਰਤ੍ਨਭੂਤਮਿਹਾਨੀਤਂ ਯਦਾਸੀਦ੍ਵੇਧਸੋऽਦ੍ਭੁਤਮ੍

vimānaṃ haṃsasaṃyuktametattiṣṭhati te'ṅgaṇe ratnabhūtamihānītaṃ yadāsīdvedhaso'dbhutam

अर्थयह हंसों से जुता हुआ अद्भुत विमान, जो ब्रह्मा का रत्न था, यहाँ लाया जाकर आपके आँगन में खड़ा है।

ਨਿਧਿਰੇष ਮਹਾਪਦ੍ਮਃ ਸਮਾਨੀਤੋ ਧਨੇਸ਼੍ਵਰਾਤ੍ ਕਿਞ੍ਜਲ੍ਕਿਨੀਂ ਦਦੌ ਚਾਬ੍ਧਿਰ੍ਮਾਲਾਮਮ੍ਲਾਨਪਙ੍ਕਜਾਮ੍

nidhireṣa mahāpadmaḥ samānīto dhaneśvarāt kiñjalkinīṃ dadau cābdhirmālāmamlānapaṅkajām

अर्थयह महापद्म नामक निधि धनपति कुबेर से लाई गई; और समुद्र ने कभी न मुरझाने वाले कमलों की किंजल्किनी माला दी।

ਛਤ੍ਰਂ ਤੇ ਵਾਰੁਣਂ ਗੇਹੇ ਕਾਞ੍ਚਨਸ੍ਰਾਵਿ ਤਿष੍ਠਤਿ ਤਥਾਯਂ ਸ੍ਯਨ੍ਦਨਵਰੋ ਯਃ ਪੁਰਾਸੀਤ੍ਪ੍ਰਜਾਪਤੇਃ

chatraṃ te vāruṇaṃ gehe kāñcanasrāvi tiṣṭhati tathāyaṃ syandanavaro yaḥ purāsītprajāpateḥ

अर्थस्वर्ण बरसाने वाला वरुण का छत्र आपके घर में है; और यह उत्तम रथ भी, जो पहले प्रजापति का था।

ਮृਤ੍ਯੋਰੁਤ੍ਕ੍ਰਾਨ੍ਤਿਦਾ ਨਾਮ ਸ਼ਕ੍ਤਿਰੀਸ਼ ਤ੍ਵਯਾ ਹृਤਾ ਪਾਸ਼ਃ ਸਲਿਲਰਾਜਸ੍ਯ ਭ੍ਰਾਤੁਸ੍ਤਵ ਪਰਿਗ੍ਰਹੇ

mṛtyorutkrāntidā nāma śaktirīśa tvayā hṛtā pāśaḥ salilarājasya bhrātustava parigrahe

अर्थहे ईश! मृत्यु की 'उत्क्रान्तिदा' नामक शक्ति आपने हर ली; और जलराज वरुण का पाश आपके भाई के अधिकार में है।

ਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਸ੍ਯਾਬ੍ਧਿਜਾਤਾਸ਼੍ਚ ਸਮਸ੍ਤਾ ਰਤ੍ਨਜਾਤਯਃ ਵਹ੍ਨਿਰਪਿ ਦਦੌ ਤੁਭ੍ਯਮਗ੍ਨਿਸ਼ੌਚੇ ਵਾਸਸੀ

niśumbhasyābdhijātāśca samastā ratnajātayaḥ vahnirapi dadau tubhyamagniśauce ca vāsasī

अर्थऔर समुद्र से उत्पन्न समस्त रत्न-समूह निशुम्भ के पास हैं; अग्नि ने भी आपको अग्नि से शुद्ध (न जलने वाले) दो वस्त्र दिए।

ਏਵਂ ਦੈਤ੍ਯੇਨ੍ਦ੍ਰ ਰਤ੍ਨਾਨਿ ਸਮਸ੍ਤਾਨ੍ਯਾਹृਤਾਨਿ ਤੇ ਸ੍ਤ੍ਰੀਰਤ੍ਨਮੇषਾ ਕਲ੍ਯਾਣੀ ਤ੍ਵਯਾ ਕਸ੍ਮਾਨ੍ਨ ਗृਹ੍ਯਤੇ

evaṃ daityendra ratnāni samastānyāhṛtāni te strīratnameṣā kalyāṇī tvayā kasmānna gṛhyate

अर्थइस प्रकार हे दैत्येन्द्र! समस्त रत्न आपके पास लाए जा चुके हैं। फिर यह कल्याणमयी स्त्री-रत्न आप क्यों नहीं ग्रहण करते?'

ऋषਿਰੁਵਾਚ ਨਿਸ਼ਮ੍ਯੇਤਿ ਵਚਃ ਸ਼ੁਮ੍ਭਃ ਤਦਾ ਚਣ੍ਡਮੁਣ੍ਡਯੋਃ ਪ੍ਰੇषਯਾਮਾਸ ਸੁਗ੍ਰੀਵਂ ਦੂਤਂ ਦੇਵ੍ਯਾ ਮਹਾਸੁਰਮ੍

ṛṣiruvāca niśamyeti vacaḥ śumbhaḥ sa tadā caṇḍamuṇḍayoḥ preṣayāmāsa sugrīvaṃ dūtaṃ devyā mahāsuram

अर्थ(ऋषि बोले —) चण्ड और मुण्ड के ये वचन सुनकर शुम्भ ने तब महान् असुर सुग्रीव को देवी के पास दूत बनाकर भेजा:

ਇਤਿ ਚੇਤਿ ਵਕ੍ਤਵ੍ਯਾ ਸਾ ਗਤ੍ਵਾ ਵਚਨਾਨ੍ਮਮ ਯਥਾ ਚਾਭ੍ਯੇਤਿ ਸਮ੍ਪ੍ਰੀਤ੍ਯਾ ਤਥਾ ਕਾਰ੍ਯਂ ਤ੍ਵਯਾ ਲਘੁ

iti ceti ca vaktavyā sā gatvā vacanānmama yathā cābhyeti samprītyā tathā kāryaṃ tvayā laghu

अर्थ'मेरे कहने से जाकर उससे इस प्रकार और इस प्रकार कहना, जिससे वह प्रसन्नतापूर्वक चली आए — और तुम यह कार्य शीघ्र करना।'

ਤਤ੍ਰ ਗਤ੍ਵਾ ਯਤ੍ਰਾਸ੍ਤੇ ਸ਼ੈਲੋਦ੍ਦੇਸ਼ੇऽਤਿਸ਼ੋਭਨੇ ਤਾਂ ਦੇਵੀਂ ਤਤਃ ਪ੍ਰਾਹ ਸ਼੍ਲਕ੍ष੍ਣਂ ਮਧੁਰਯਾ ਗਿਰਾ

sa tatra gatvā yatrāste śailoddeśe'tiśobhane tāṃ ca devīṃ tataḥ prāha ślakṣṇaṃ madhurayā girā

अर्थवह वहाँ गया जहाँ देवी उस अत्यन्त शोभायमान पर्वत-प्रदेश पर विराजमान थीं, और फिर मधुर वाणी में कोमलता से देवी से बोला:

ਦੂਤ ਉਵਾਚ ਦੇਵਿ ਦੈਤ੍ਯੇਸ਼੍ਵਰਃ ਸ਼ੁਮ੍ਭਸ੍ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯੇ ਪਰਮੇਸ਼੍ਵਰਃ ਦੂਤੋऽਹਂ ਪ੍ਰੇषਿਤਸ੍ਤੇਨ ਤ੍ਵਤ੍ਸਕਾਸ਼ਮਿਹਾਗਤਃ

dūta uvāca devi daityeśvaraḥ śumbhastrailokye parameśvaraḥ dūto'haṃ preṣitastena tvatsakāśamihāgataḥ

अर्थ(दूत बोला —) 'हे देवी! दैत्येश्वर शुम्भ तीनों लोकों के परमेश्वर हैं; मैं उनका दूत हूँ, उनके भेजने पर यहाँ आपके पास आया हूँ।

ਅਵ੍ਯਾਹਤਾਜ੍ਞਃ ਸਰ੍ਵਾਸੁ ਯਃ ਸਦਾ ਦੇਵਯੋਨਿषੁ ਨਿਰ੍ਜਿਤਾਖਿਲਦੈਤ੍ਯਾਰਿਃ ਯਦਾਹ ਸ਼‍ृਣੁष੍ਵ ਤਤ੍

avyāhatājñaḥ sarvāsu yaḥ sadā devayoniṣu nirjitākhiladaityāriḥ sa yadāha śa‍ṛṇuṣva tat

अर्थजिनकी आज्ञा समस्त देवयोनियों में अबाधित रहती है, जिन्होंने दैत्यों के समस्त शत्रुओं को जीत लिया — वे जो कहते हैं, उसे सुनिए:

ਮਮ ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯਮਖਿਲਂ ਮਮ ਦੇਵਾ ਵਸ਼ਾਨੁਗਾਃ ਯਜ੍ਞਭਾਗਾਨਹਂ ਸਰ੍ਵਾਨੁਪਾਸ਼੍ਨਾਮਿ ਪृਥਕ੍ ਪृਥਕ੍

mama trailokyamakhilaṃ mama devā vaśānugāḥ yajñabhāgānahaṃ sarvānupāśnāmi pṛthak pṛthak

अर्थ"समस्त त्रैलोक्य मेरा है, देवता मेरे वश में हैं; मैं समस्त यज्ञभागों को अलग-अलग भोगता हूँ।

ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯੇ ਵਰਰਤ੍ਨਾਨਿ ਮਮ ਵਸ਼੍ਯਾਨ੍ਯਸ਼ੇषਤਃ ਤਥੈਵ ਗਜਰਤ੍ਨਂ ਹृਤਂ ਦੇਵੇਨ੍ਦ੍ਰਵਾਹਨਮ੍

trailokye vararatnāni mama vaśyānyaśeṣataḥ tathaiva gajaratnaṃ ca hṛtaṃ devendravāhanam

अर्थतीनों लोकों के समस्त उत्तम रत्न पूर्णतः मेरे वश में हैं; और वैसे ही देवराज का वाहन हाथी-रत्न भी छीन लिया गया है।

ਕ੍षੀਰੋਦਮਥਨੋਦ੍ਭੂਤਮਸ਼੍ਵਰਤ੍ਨਂ ਮਮਾਮਰੈਃ ਉਚ੍ਚੈਃਸ਼੍ਰਵਸਸਂਜ੍ਞਂ ਤਤ੍ਪ੍ਰਣਿਪਤ੍ਯ ਸਮਰ੍ਪਿਤਮ੍

kṣīrodamathanodbhūtamaśvaratnaṃ mamāmaraiḥ uccaiḥśravasasaṃjñaṃ tatpraṇipatya samarpitam

अर्थक्षीरसागर के मंथन से उत्पन्न उच्चैःश्रवा नामक अश्व-रत्न देवताओं ने मुझे प्रणामपूर्वक अर्पित किया।

ਯਾਨਿ ਚਾਨ੍ਯਾਨਿ ਦੇਵੇषੁ ਗਨ੍ਧਰ੍ਵੇषੂਰਗੇषੁ ਰਤ੍ਨਭੂਤਾਨਿ ਭੂਤਾਨਿ ਤਾਨਿ ਮਯ੍ਯੇਵ ਸ਼ੋਭਨੇ

yāni cānyāni deveṣu gandharveṣūrageṣu ca ratnabhūtāni bhūtāni tāni mayyeva śobhane

अर्थऔर देवताओं, गन्धर्वों तथा नागों में जो अन्य रत्न-स्वरूप वस्तुएँ थीं, हे शोभने! वे भी मुझ में ही हैं।

ਸ੍ਤ੍ਰੀਰਤ੍ਨਭੂਤਾਂ ਤ੍ਵਾਂ ਦੇਵਿ ਲੋਕੇ ਮਨ੍ਯਾਮਹੇ ਵਯਮ੍ ਸਾ ਤ੍ਵਮਸ੍ਮਾਨੁਪਾਗਚ੍ਛ ਯਤੋ ਰਤ੍ਨਭੁਜੋ ਵਯਮ੍

strīratnabhūtāṃ tvāṃ devi loke manyāmahe vayam sā tvamasmānupāgaccha yato ratnabhujo vayam

अर्थहे देवी! हम आपको संसार में स्त्री-रत्न मानते हैं; अतः आप हमारे पास आ जाइए, क्योंकि हम रत्नों के भोक्ता हैं।

ਮਾਂ ਵਾ ਮਮਾਨੁਜਂ ਵਾਪਿ ਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਮੁਰੁਵਿਕ੍ਰਮਮ੍ ਭਜ ਤ੍ਵਂ ਚਞ੍ਚਲਾਪਾਙ੍ਗਿ ਰਤ੍ਨਭੂਤਾਸਿ ਵੈ ਯਤਃ

māṃ vā mamānujaṃ vāpi niśumbhamuruvikramam bhaja tvaṃ cañcalāpāṅgi ratnabhūtāsi vai yataḥ

अर्थहे चंचल कटाक्ष वाली! आप मुझे अथवा मेरे महापराक्रमी छोटे भाई निशुम्भ को भजिए, क्योंकि आप निश्चय ही रत्न-स्वरूपा हैं।

ਪਰਮੈਸ਼੍ਵਰ੍ਯਮਤੁਲਂ ਪ੍ਰਾਪ੍ਸ੍ਯਸੇ ਮਤ੍ਪਰਿਗ੍ਰਹਾਤ੍ ਏਤਦ੍ਬੁਦ੍ਧ੍ਯਾ ਸਮਾਲੋਚ੍ਯ ਮਤ੍ਪਰਿਗ੍ਰਹਤਾਂ ਵ੍ਰਜ

paramaiśvaryamatulaṃ prāpsyase matparigrahāt etadbuddhyā samālocya matparigrahatāṃ vraja

अर्थमेरे ग्रहण करने से आप अतुलनीय परम ऐश्वर्य पाएँगी। इसे बुद्धि से विचारकर मेरी स्वीकृति में आइए।"'

ऋषਿਰੁਵਾਚ ਇਤ੍ਯੁਕ੍ਤਾ ਸਾ ਤਦਾ ਦੇਵੀ ਗਮ੍ਭੀਰਾਨ੍ਤਃਸ੍ਮਿਤਾ ਜਗੌ ਦੁਰ੍ਗਾ ਭਗਵਤੀ ਭਦ੍ਰਾ ਯਯੇਦਂ ਧਾਰ੍ਯਤੇ ਜਗਤ੍

ṛṣiruvāca ityuktā sā tadā devī gambhīrāntaḥsmitā jagau durgā bhagavatī bhadrā yayedaṃ dhāryate jagat

अर्थ(ऋषि बोले —) इस प्रकार कहे जाने पर तब वे देवी — दुर्गा, भगवती, भद्रा, जिनसे यह जगत् धारण किया जाता है — गम्भीर अन्तर्हास के साथ बोलीं:

ਦੇਵ੍ਯੁਵਾਚ ਸਤ੍ਯਮੁਕ੍ਤਂ ਤ੍ਵਯਾ ਨਾਤ੍ਰ ਮਿਥ੍ਯਾ ਕਿਞ੍ਚਿਤ੍ਤ੍ਵਯੋਦਿਤਮ੍ ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯਾਧਿਪਤਿਃ ਸ਼ੁਮ੍ਭੋ ਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਸ਼੍ਚਾਪਿ ਤਾਦृਸ਼ਃ

devyuvāca satyamuktaṃ tvayā nātra mithyā kiñcittvayoditam trailokyādhipatiḥ śumbho niśumbhaścāpi tādṛśaḥ

अर्थ(देवी बोलीं —) 'तुमने सत्य कहा, इसमें तुमने कुछ भी असत्य नहीं कहा। शुम्भ सचमुच त्रैलोक्य का अधिपति है, और वैसा ही निशुम्भ भी।

ਕਿਂ ਤ੍ਵਤ੍ਰ ਯਤ੍ਪ੍ਰਤਿਜ੍ਞਾਤਂ ਮਿਥ੍ਯਾ ਤਤ੍ਕ੍ਰਿਯਤੇ ਕਥਮ੍ ਸ਼੍ਰੂਯਤਾਮਲ੍ਪਬੁਦ੍ਧਿਤ੍ਵਾਤ੍ਪ੍ਰਤਿਜ੍ਞਾ ਯਾ ਕृਤਾ ਪੁਰਾ

kiṃ tvatra yatpratijñātaṃ mithyā tatkriyate katham śrūyatāmalpabuddhitvātpratijñā yā kṛtā purā

अर्थकिन्तु इस विषय में जो प्रतिज्ञा की गई है, वह मिथ्या कैसे की जाए? अल्पबुद्धिवश पहले मैंने जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सुनो:

ਯੋ ਮਾਂ ਜਯਤਿ ਸਙ੍ਗ੍ਰਾਮੇ ਯੋ ਮੇ ਦਰ੍ਪਂ ਵ੍ਯਪੋਹਤਿ ਯੋ ਮੇ ਪ੍ਰਤਿਬਲੋ ਲੋਕੇ ਮੇ ਭਰ੍ਤਾ ਭਵਿष੍ਯਤਿ

yo māṃ jayati saṅgrāme yo me darpaṃ vyapohati yo me pratibalo loke sa me bhartā bhaviṣyati

अर्थ'जो मुझे युद्ध में जीत ले, जो मेरे दर्प को दूर कर दे, जो संसार में मेरे बराबर बल वाला हो — वही मेरा पति होगा।'

ਤਦਾਗਚ੍ਛਤੁ ਸ਼ੁਮ੍ਭੋऽਤ੍ਰ ਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭੋ ਵਾ ਮਹਾਬਲਃ ਮਾਂ ਜਿਤ੍ਵਾ ਕਿਂ ਚਿਰੇਣਾਤ੍ਰ ਪਾਣਿਂ ਗृਹ੍ਣਾਤੁ ਮੇ ਲਘੁ

tadāgacchatu śumbho'tra niśumbho vā mahābalaḥ māṃ jitvā kiṃ cireṇātra pāṇiṃ gṛhṇātu me laghu

अर्थअतः शुम्भ यहाँ आ जाए, अथवा महाबली निशुम्भ; मुझे जीतकर वह शीघ्र मेरा पाणिग्रहण कर ले — विलम्ब से क्या?'

ਦੂਤ ਉਵਾਚ ਅਵਲਿਪ੍ਤਾਸਿ ਮੈਵਂ ਤ੍ਵਂ ਦੇਵਿ ਬ੍ਰੂਹਿ ਮਮਾਗ੍ਰਤਃ ਤ੍ਰੈਲੋਕ੍ਯੇ ਕਃ ਪੁਮਾਂਸ੍ਤਿष੍ਠੇਦਗ੍ਰੇ ਸ਼ੁਮ੍ਭਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਯੋਃ

dūta uvāca avaliptāsi maivaṃ tvaṃ devi brūhi mamāgrataḥ trailokye kaḥ pumāṃstiṣṭhedagre śumbhaniśumbhayoḥ

अर्थ(दूत बोला —) 'तुम घमण्ड में हो। हे देवी! मेरे सामने ऐसा मत कहो! तीनों लोकों में कौन पुरुष शुम्भ-निशुम्भ के सामने टिक सकता है?

ਅਨ੍ਯੇषਾਮਪਿ ਦੈਤ੍ਯਾਨਾਂ ਸਰ੍ਵੇ ਦੇਵਾ ਵੈ ਯੁਧਿ ਤਿष੍ਠਨ੍ਤਿ ਸਮ੍ਮੁਖੇ ਦੇਵਿ ਕਿਂ ਪੁਨਃ ਸ੍ਤ੍ਰੀ ਤ੍ਵਮੇਕਿਕਾ

anyeṣāmapi daityānāṃ sarve devā na vai yudhi tiṣṭhanti sammukhe devi kiṃ punaḥ strī tvamekikā

अर्थहे देवी! अन्य दैत्यों के सामने भी समस्त देवता युद्ध में नहीं ठहर पाते; फिर तुम अकेली स्त्री तो कैसे ठहरोगी?

ਇਨ੍ਦ੍ਰਾਦ੍ਯਾਃ ਸਕਲਾ ਦੇਵਾਸ੍ਤਸ੍ਥੁਰ੍ਯੇषਾਂ ਸਂਯੁਗੇ ਸ਼ੁਮ੍ਭਾਦੀਨਾਂ ਕਥਂ ਤੇषਾਂ ਸ੍ਤ੍ਰੀ ਪ੍ਰਯਾਸ੍ਯਸਿ ਸਮ੍ਮੁਖਮ੍

indrādyāḥ sakalā devāstasthuryeṣāṃ na saṃyuge śumbhādīnāṃ kathaṃ teṣāṃ strī prayāsyasi sammukham

अर्थजिनके सामने इन्द्र आदि समस्त देवता युद्ध में नहीं टिक सके, उन शुम्भ आदि के सामने तुम स्त्री होकर कैसे जाओगी?

ਸਾ ਤ੍ਵਂ ਗਚ੍ਛ ਮਯੈਵੋਕ੍ਤਾ ਪਾਰ੍ਸ਼੍ਵਂ ਸ਼ੁਮ੍ਭਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਯੋਃ ਕੇਸ਼ਾਕਰ੍षਣਨਿਰ੍ਧੂਤਗੌਰਵਾ ਮਾ ਗਮਿष੍ਯਸਿ

sā tvaṃ gaccha mayaivoktā pārśvaṃ śumbhaniśumbhayoḥ keśākarṣaṇanirdhūtagauravā mā gamiṣyasi

अर्थअतः मेरे कहने से तुम शुम्भ-निशुम्भ के पास चली जाओ; ऐसा न हो कि केश पकड़कर खींचे जाने से तुम्हारा गौरव नष्ट हो जाए।'

ਦੇਵ੍ਯੁਵਾਚ ਏਵਮੇਤਦ੍ ਬਲੀ ਸ਼ੁਮ੍ਭੋ ਨਿਸ਼ੁਮ੍ਭਸ਼੍ਚਾਪਿਤਾਦृਸ਼ਃ ਕਿਂ ਕਰੋਮਿ ਪ੍ਰਤਿਜ੍ਞਾ ਮੇ ਯਦਨਾਲੋਚਿਤਾ ਪੁਰਾ

devyuvāca evametad balī śumbho niśumbhaścāpitādṛśaḥ kiṃ karomi pratijñā me yadanālocitā purā

अर्थ(देवी बोलीं —) 'ऐसा ही है — शुम्भ बलवान् है, और निशुम्भ भी वैसा ही। मैं क्या करूँ? मेरी प्रतिज्ञा पहले बिना विचारे ही की गई थी।

ਤ੍ਵਂ ਗਚ੍ਛ ਮਯੋਕ੍ਤਂ ਤੇ ਯਦੇਤਤ੍ਸਰ੍ਵਮਾਦृਤਃ ਤਦਾਚਕ੍ष੍ਵਾਸੁਰੇਨ੍ਦ੍ਰਾਯ ਯੁਕ੍ਤਂ ਕਰੋਤੁ ਯਤ੍

sa tvaṃ gaccha mayoktaṃ te yadetatsarvamādṛtaḥ tadācakṣvāsurendrāya sa ca yuktaṃ karotu yat

अर्थअतः तुम जाओ, और जो कुछ मैंने कहा है वह सब आदरपूर्वक असुरराज से कह दो; और वह जो उचित हो वही करे।'