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दुर्गा सप्तशती 5.8

अध्याय 5, श्लोक 8

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

रौद्रायै नमो नित्यायै गौर्यै धात्र्यै नमो नमः ज्योत्स्नायै चेन्दुरूपिण्यै सुखायै सततं नमः

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लिप्यंतरण

raudrāyai namo nityāyai gauryai dhātryai namo namaḥ jyotsnāyai cendurūpiṇyai sukhāyai satataṃ namaḥ

अर्थ

रौद्री को, नित्या को, गौरी को, धात्री को नमस्कार-नमस्कार; ज्योत्स्ना (चाँदनी) को और चन्द्ररूपिणी को, सुख-स्वरूपा को निरन्तर नमस्कार।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.8 का अर्थ क्या है?
रौद्री को, नित्या को, गौरी को, धात्री को नमस्कार-नमस्कार; ज्योत्स्ना (चाँदनी) को और चन्द्ररूपिणी को, सुख-स्वरूपा को निरन्तर नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 8वाँ श्लोक है।