अध्याय 5, श्लोक 7
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवाददेवा ऊचुः नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः । नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ॥
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लिप्यंतरण
devā ūcuḥ namo devyai mahādevyai śivāyai satataṃ namaḥ namaḥ prakṛtyai bhadrāyai niyatāḥ praṇatāḥ sma tām
अर्थ
(देवता बोले —) देवी को, महादेवी को, शिवा को निरन्तर नमस्कार; प्रकृति को, भद्रा को नमस्कार — हम नियमपूर्वक उन्हें प्रणाम करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.7 का अर्थ क्या है?▼
(देवता बोले —) देवी को, महादेवी को, शिवा को निरन्तर नमस्कार; प्रकृति को, भद्रा को नमस्कार — हम नियमपूर्वक उन्हें प्रणाम करते हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 7वाँ श्लोक है।