अध्याय 5, श्लोक 6
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादइति कृत्वा मतिं देवा हिमवन्तं नगेश्वरम् । जग्मुस्तत्र ततो देवीं विष्णुमायां प्रतुष्टुवुः ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
iti kṛtvā matiṃ devā himavantaṃ nageśvaram jagmustatra tato devīṃ viṣṇumāyāṃ pratuṣṭuvuḥ
अर्थ
ऐसा निश्चय करके देवता पर्वतराज हिमवान् के पास गए, और वहाँ विष्णुमाया उस देवी की स्तुति करने लगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.6 का अर्थ क्या है?▼
ऐसा निश्चय करके देवता पर्वतराज हिमवान् के पास गए, और वहाँ विष्णुमाया उस देवी की स्तुति करने लगे।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 6वाँ श्लोक है।