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दुर्गा सप्तशती 5.5

अध्याय 5, श्लोक 5

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

तयास्माकं वरो दत्तो यथापत्सु स्मृताखिलाः भवतां नाशयिष्यामि तत्क्षणात्परमापदः

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लिप्यंतरण

tayāsmākaṃ varo datto yathāpatsu smṛtākhilāḥ bhavatāṃ nāśayiṣyāmi tatkṣaṇātparamāpadaḥ

अर्थ

'उन्होंने हमें यह वर दिया था — "जब-जब विपत्ति में तुम सब मेरा स्मरण करोगे, उसी क्षण मैं तुम्हारी घोर विपत्तियों का नाश कर दूँगी।"'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.5 का अर्थ क्या है?
'उन्होंने हमें यह वर दिया था — "जब-जब विपत्ति में तुम सब मेरा स्मरण करोगे, उसी क्षण मैं तुम्हारी घोर विपत्तियों का नाश कर दूँगी।"'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 5वाँ श्लोक है।