श्रीदुर्गासप्तशती (देवी माहात्म्य)
देवी माहात्म्य अथवा चण्डी पाठ — मार्कण्डेय पुराण से 13 अध्यायों में 700 श्लोक, जो दिव्य माता को परम शक्ति के रूप में महिमामंडित करते हैं जो प्रत्येक असुर का संहार कर ब्रह्मांड की रक्षा करती हैं। देवी उपासना का सर्वोच्च ग्रंथ, जिसका पाठ विशेषकर नवरात्रि में होता है।
तीन चरित्र
प्रथम चरित्र (अध्याय 1)
अधिष्ठात्री देवी: महाकाली
प्रथम चरित्र — अधिष्ठात्री देवी महाकाली। ऋषि ब्रह्मा इसके द्रष्टा हैं; इसमें मधु-कैटभ की कथा द्वारा देवी का योगनिद्रा रूप प्रकट होता है।
मध्यम चरित्र (अध्याय 2–4)
अधिष्ठात्री देवी: महालक्ष्मी
मध्यम चरित्र — अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी। इसमें महिषासुर के उदय व संहार तथा देवताओं की स्तुति का वर्णन है।
उत्तम चरित्र (अध्याय 5–13)
अधिष्ठात्री देवी: महासरस्वती
उत्तम चरित्र — अधिष्ठात्री देवी महासरस्वती। इसमें शुम्भ, निशुम्भ, रक्तबीज की कथा और देवी की महान् स्तुतियाँ हैं।
13 अध्याय
किसी भी अध्याय पर टैप करें और उसके सभी श्लोक संस्कृत में, लिप्यंतरण व अर्थ सहित पढ़ें। (अध्याय निरंतर जोड़े जा रहे हैं।)
मधु-कैटभ वध
90 श्लोकमधु और कैटभ का वध — योगनिद्रा (महामाया) विष्णु को जगाकर दोनों असुरों का संहार कराती हैं।
महिषासुर सैन्य वध
68 श्लोकदेवताओं के तेज से प्रकट देवी द्वारा महिषासुर की सेना का संहार।
महिषासुर वध
41 श्लोकदेवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध।
शक्रादि स्तुति
जल्द आ रहा हैविजय के पश्चात् इंद्र आदि देवताओं द्वारा देवी की स्तुति।
देवी-दूत संवाद
जल्द आ रहा हैशुम्भ के दूत से देवी का संवाद — इसमें प्रसिद्ध 'या देवी सर्वभूतेषु' स्तुति है।
धूम्रलोचन वध
जल्द आ रहा हैसेनापति धूम्रलोचन का वध।
चण्ड-मुण्ड वध
जल्द आ रहा हैदेवी से प्रकट काली (चामुण्डा) द्वारा चण्ड और मुण्ड का वध।
रक्तबीज वध
जल्द आ रहा हैरक्तबीज का वध, जिसके रक्त की प्रत्येक बूँद से नया असुर उत्पन्न होता था।
निशुम्भ वध
जल्द आ रहा हैअसुर निशुम्भ का वध।
शुम्भ वध
जल्द आ रहा हैअंतिम महान् असुरराज शुम्भ का वध।
नारायणी स्तुति
जल्द आ रहा हैदेवता देवी की नारायणी रूप में स्तुति करते हैं; वे अपने भावी अवतारों का वर्णन करती हैं।
फलश्रुति — भगवती वाक्य
जल्द आ रहा हैदेवी माहात्म्य के पाठ का फल और महिमा स्वयं देवी कहती हैं।
सुरथ-वैश्य वरप्रदान
जल्द आ रहा हैदेवी राजा सुरथ और वैश्य समाधि को वर प्रदान करती हैं।