Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 5.9

अध्याय 5, श्लोक 9

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

कल्याण्यै प्रणतां वृद्ध्यै सिद्ध्यै कुर्मो नमो नमः नैरृत्यै भूभृतां लक्ष्म्यै शर्वाण्यै ते नमो नमः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

kalyāṇyai praṇatāṃ vṛddhyai siddhyai kurmo namo namaḥ nairṛtyai bhūbhṛtāṃ lakṣmyai śarvāṇyai te namo namaḥ

अर्थ

कल्याणी को, प्रणत जनों की वृद्धिरूपा को, सिद्धि को हम नमस्कार करते हैं; नैऋती को, राजाओं की लक्ष्मी को, शर्वाणी को आपको नमस्कार-नमस्कार।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.9 का अर्थ क्या है?
कल्याणी को, प्रणत जनों की वृद्धिरूपा को, सिद्धि को हम नमस्कार करते हैं; नैऋती को, राजाओं की लक्ष्मी को, शर्वाणी को आपको नमस्कार-नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 9वाँ श्लोक है।