Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 5.10

अध्याय 5, श्लोक 10

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै ख्यात्यै तथैव कृष्णायै धूम्रायै सततं नमः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

durgāyai durgapārāyai sārāyai sarvakāriṇyai khyātyai tathaiva kṛṣṇāyai dhūmrāyai satataṃ namaḥ

अर्थ

दुर्गा को, दुर्गम (संसार) से पार उतारने वाली को, सार-स्वरूपा को, सब कुछ करने वाली को, ख्याति को, तथा कृष्णा और धूम्रा को निरन्तर नमस्कार।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.10 का अर्थ क्या है?
दुर्गा को, दुर्गम (संसार) से पार उतारने वाली को, सार-स्वरूपा को, सब कुछ करने वाली को, ख्याति को, तथा कृष्णा और धूम्रा को निरन्तर नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 10वाँ श्लोक है।