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दुर्गा सप्तशती 5.11

अध्याय 5, श्लोक 11

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः

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लिप्यंतरण

atisaumyātiraudrāyai natāstasyai namo namaḥ namo jagatpratiṣṭhāyai devyai kṛtyai namo namaḥ

अर्थ

अत्यन्त सौम्य और अत्यन्त रौद्र रूप वाली को हम नमस्कार करते हैं, उन्हें नमस्कार-नमस्कार; जगत् की प्रतिष्ठा-स्वरूपा कृति-रूप देवी को नमस्कार-नमस्कार।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.11 का अर्थ क्या है?
अत्यन्त सौम्य और अत्यन्त रौद्र रूप वाली को हम नमस्कार करते हैं, उन्हें नमस्कार-नमस्कार; जगत् की प्रतिष्ठा-स्वरूपा कृति-रूप देवी को नमस्कार-नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 11वाँ श्लोक है।