Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 5.12

अध्याय 5, श्लोक 12

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

yā devī sarvabhūteṣu viṣṇumāyeti śabditā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थ

जो देवी समस्त प्राणियों में 'विष्णुमाया' नाम से कही जाती हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.12 का अर्थ क्या है?
जो देवी समस्त प्राणियों में 'विष्णुमाया' नाम से कही जाती हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 12वाँ श्लोक है।