अध्याय 5, श्लोक 70
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादतदागच्छतु शुम्भोऽत्र निशुम्भो वा महाबलः । मां जित्वा किं चिरेणात्र पाणिं गृह्णातु मे लघु ॥
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लिप्यंतरण
tadāgacchatu śumbho'tra niśumbho vā mahābalaḥ māṃ jitvā kiṃ cireṇātra pāṇiṃ gṛhṇātu me laghu
अर्थ
अतः शुम्भ यहाँ आ जाए, अथवा महाबली निशुम्भ; मुझे जीतकर वह शीघ्र मेरा पाणिग्रहण कर ले — विलम्ब से क्या?'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.70 का अर्थ क्या है?▼
अतः शुम्भ यहाँ आ जाए, अथवा महाबली निशुम्भ; मुझे जीतकर वह शीघ्र मेरा पाणिग्रहण कर ले — विलम्ब से क्या?'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 70वाँ श्लोक है।