अध्याय 5, श्लोक 73
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादइन्द्राद्याः सकला देवास्तस्थुर्येषां न संयुगे । शुम्भादीनां कथं तेषां स्त्री प्रयास्यसि सम्मुखम् ॥
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लिप्यंतरण
indrādyāḥ sakalā devāstasthuryeṣāṃ na saṃyuge śumbhādīnāṃ kathaṃ teṣāṃ strī prayāsyasi sammukham
अर्थ
जिनके सामने इन्द्र आदि समस्त देवता युद्ध में नहीं टिक सके, उन शुम्भ आदि के सामने तुम स्त्री होकर कैसे जाओगी?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.73 का अर्थ क्या है?▼
जिनके सामने इन्द्र आदि समस्त देवता युद्ध में नहीं टिक सके, उन शुम्भ आदि के सामने तुम स्त्री होकर कैसे जाओगी?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 73वाँ श्लोक है।