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दुर्गा सप्तशती 5.74

अध्याय 5, श्लोक 74

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

सा त्वं गच्छ मयैवोक्ता पार्श्वं शुम्भनिशुम्भयोः केशाकर्षणनिर्धूतगौरवा मा गमिष्यसि

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लिप्यंतरण

sā tvaṃ gaccha mayaivoktā pārśvaṃ śumbhaniśumbhayoḥ keśākarṣaṇanirdhūtagauravā mā gamiṣyasi

अर्थ

अतः मेरे कहने से तुम शुम्भ-निशुम्भ के पास चली जाओ; ऐसा न हो कि केश पकड़कर खींचे जाने से तुम्हारा गौरव नष्ट हो जाए।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.74 का अर्थ क्या है?
अतः मेरे कहने से तुम शुम्भ-निशुम्भ के पास चली जाओ; ऐसा न हो कि केश पकड़कर खींचे जाने से तुम्हारा गौरव नष्ट हो जाए।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 74वाँ श्लोक है।