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दुर्गा सप्तशती 5.72

अध्याय 5, श्लोक 72

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

अन्येषामपि दैत्यानां सर्वे देवा वै युधि तिष्ठन्ति सम्मुखे देवि किं पुनः स्त्री त्वमेकिका

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लिप्यंतरण

anyeṣāmapi daityānāṃ sarve devā na vai yudhi tiṣṭhanti sammukhe devi kiṃ punaḥ strī tvamekikā

अर्थ

हे देवी! अन्य दैत्यों के सामने भी समस्त देवता युद्ध में नहीं ठहर पाते; फिर तुम अकेली स्त्री तो कैसे ठहरोगी?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.72 का अर्थ क्या है?
हे देवी! अन्य दैत्यों के सामने भी समस्त देवता युद्ध में नहीं ठहर पाते; फिर तुम अकेली स्त्री तो कैसे ठहरोगी?
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 72वाँ श्लोक है।