अध्याय 5, श्लोक 56
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादस तत्र गत्वा यत्रास्ते शैलोद्देशेऽतिशोभने । तां च देवीं ततः प्राह श्लक्ष्णं मधुरया गिरा ॥
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लिप्यंतरण
sa tatra gatvā yatrāste śailoddeśe'tiśobhane tāṃ ca devīṃ tataḥ prāha ślakṣṇaṃ madhurayā girā
अर्थ
वह वहाँ गया जहाँ देवी उस अत्यन्त शोभायमान पर्वत-प्रदेश पर विराजमान थीं, और फिर मधुर वाणी में कोमलता से देवी से बोला:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.56 का अर्थ क्या है?▼
वह वहाँ गया जहाँ देवी उस अत्यन्त शोभायमान पर्वत-प्रदेश पर विराजमान थीं, और फिर मधुर वाणी में कोमलता से देवी से बोला:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 56वाँ श्लोक है।