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दुर्गा सप्तशती 5.55

अध्याय 5, श्लोक 55

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

इति चेति वक्तव्या सा गत्वा वचनान्मम यथा चाभ्येति सम्प्रीत्या तथा कार्यं त्वया लघु

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लिप्यंतरण

iti ceti ca vaktavyā sā gatvā vacanānmama yathā cābhyeti samprītyā tathā kāryaṃ tvayā laghu

अर्थ

'मेरे कहने से जाकर उससे इस प्रकार और इस प्रकार कहना, जिससे वह प्रसन्नतापूर्वक चली आए — और तुम यह कार्य शीघ्र करना।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.55 का अर्थ क्या है?
'मेरे कहने से जाकर उससे इस प्रकार और इस प्रकार कहना, जिससे वह प्रसन्नतापूर्वक चली आए — और तुम यह कार्य शीघ्र करना।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 55वाँ श्लोक है।