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दुर्गा सप्तशती 5.54

अध्याय 5, श्लोक 54

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

ऋषिरुवाच निशम्येति वचः शुम्भः तदा चण्डमुण्डयोः प्रेषयामास सुग्रीवं दूतं देव्या महासुरम्

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लिप्यंतरण

ṛṣiruvāca niśamyeti vacaḥ śumbhaḥ sa tadā caṇḍamuṇḍayoḥ preṣayāmāsa sugrīvaṃ dūtaṃ devyā mahāsuram

अर्थ

(ऋषि बोले —) चण्ड और मुण्ड के ये वचन सुनकर शुम्भ ने तब महान् असुर सुग्रीव को देवी के पास दूत बनाकर भेजा:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.54 का अर्थ क्या है?
(ऋषि बोले —) चण्ड और मुण्ड के ये वचन सुनकर शुम्भ ने तब महान् असुर सुग्रीव को देवी के पास दूत बनाकर भेजा:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 54वाँ श्लोक है।