अध्याय 5, श्लोक 53
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादएवं दैत्येन्द्र रत्नानि समस्तान्याहृतानि ते । स्त्रीरत्नमेषा कल्याणी त्वया कस्मान्न गृह्यते ॥
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लिप्यंतरण
evaṃ daityendra ratnāni samastānyāhṛtāni te strīratnameṣā kalyāṇī tvayā kasmānna gṛhyate
अर्थ
इस प्रकार हे दैत्येन्द्र! समस्त रत्न आपके पास लाए जा चुके हैं। फिर यह कल्याणमयी स्त्री-रत्न आप क्यों नहीं ग्रहण करते?'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.53 का अर्थ क्या है?▼
इस प्रकार हे दैत्येन्द्र! समस्त रत्न आपके पास लाए जा चुके हैं। फिर यह कल्याणमयी स्त्री-रत्न आप क्यों नहीं ग्रहण करते?'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 53वाँ श्लोक है।