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दुर्गा सप्तशती 5.52

अध्याय 5, श्लोक 52

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

निशुम्भस्याब्धिजाताश्च समस्ता रत्नजातयः वह्निरपि ददौ तुभ्यमग्निशौचे वाससी

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लिप्यंतरण

niśumbhasyābdhijātāśca samastā ratnajātayaḥ vahnirapi dadau tubhyamagniśauce ca vāsasī

अर्थ

और समुद्र से उत्पन्न समस्त रत्न-समूह निशुम्भ के पास हैं; अग्नि ने भी आपको अग्नि से शुद्ध (न जलने वाले) दो वस्त्र दिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.52 का अर्थ क्या है?
और समुद्र से उत्पन्न समस्त रत्न-समूह निशुम्भ के पास हैं; अग्नि ने भी आपको अग्नि से शुद्ध (न जलने वाले) दो वस्त्र दिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 52वाँ श्लोक है।