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दुर्गा सप्तशती 5.51

अध्याय 5, श्लोक 51

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

मृत्योरुत्क्रान्तिदा नाम शक्तिरीश त्वया हृता पाशः सलिलराजस्य भ्रातुस्तव परिग्रहे

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लिप्यंतरण

mṛtyorutkrāntidā nāma śaktirīśa tvayā hṛtā pāśaḥ salilarājasya bhrātustava parigrahe

अर्थ

हे ईश! मृत्यु की 'उत्क्रान्तिदा' नामक शक्ति आपने हर ली; और जलराज वरुण का पाश आपके भाई के अधिकार में है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.51 का अर्थ क्या है?
हे ईश! मृत्यु की 'उत्क्रान्तिदा' नामक शक्ति आपने हर ली; और जलराज वरुण का पाश आपके भाई के अधिकार में है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 51वाँ श्लोक है।