अध्याय 5, श्लोक 57
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवाददूत उवाच देवि दैत्येश्वरः शुम्भस्त्रैलोक्ये परमेश्वरः । दूतोऽहं प्रेषितस्तेन त्वत्सकाशमिहागतः ॥
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लिप्यंतरण
dūta uvāca devi daityeśvaraḥ śumbhastrailokye parameśvaraḥ dūto'haṃ preṣitastena tvatsakāśamihāgataḥ
अर्थ
(दूत बोला —) 'हे देवी! दैत्येश्वर शुम्भ तीनों लोकों के परमेश्वर हैं; मैं उनका दूत हूँ, उनके भेजने पर यहाँ आपके पास आया हूँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.57 का अर्थ क्या है?▼
(दूत बोला —) 'हे देवी! दैत्येश्वर शुम्भ तीनों लोकों के परमेश्वर हैं; मैं उनका दूत हूँ, उनके भेजने पर यहाँ आपके पास आया हूँ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 57वाँ श्लोक है।