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दुर्गा सप्तशती 5.58

अध्याय 5, श्लोक 58

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

अव्याहताज्ञः सर्वासु यः सदा देवयोनिषु निर्जिताखिलदैत्यारिः यदाह श‍ृणुष्व तत्

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लिप्यंतरण

avyāhatājñaḥ sarvāsu yaḥ sadā devayoniṣu nirjitākhiladaityāriḥ sa yadāha śa‍ṛṇuṣva tat

अर्थ

जिनकी आज्ञा समस्त देवयोनियों में अबाधित रहती है, जिन्होंने दैत्यों के समस्त शत्रुओं को जीत लिया — वे जो कहते हैं, उसे सुनिए:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.58 का अर्थ क्या है?
जिनकी आज्ञा समस्त देवयोनियों में अबाधित रहती है, जिन्होंने दैत्यों के समस्त शत्रुओं को जीत लिया — वे जो कहते हैं, उसे सुनिए:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 58वाँ श्लोक है।