अध्याय 5, श्लोक 59
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादमम त्रैलोक्यमखिलं मम देवा वशानुगाः । यज्ञभागानहं सर्वानुपाश्नामि पृथक् पृथक् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
mama trailokyamakhilaṃ mama devā vaśānugāḥ yajñabhāgānahaṃ sarvānupāśnāmi pṛthak pṛthak
अर्थ
"समस्त त्रैलोक्य मेरा है, देवता मेरे वश में हैं; मैं समस्त यज्ञभागों को अलग-अलग भोगता हूँ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.59 का अर्थ क्या है?▼
"समस्त त्रैलोक्य मेरा है, देवता मेरे वश में हैं; मैं समस्त यज्ञभागों को अलग-अलग भोगता हूँ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 59वाँ श्लोक है।