अध्याय 5, श्लोक 60
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादत्रैलोक्ये वररत्नानि मम वश्यान्यशेषतः । तथैव गजरत्नं च हृतं देवेन्द्रवाहनम् ॥
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लिप्यंतरण
trailokye vararatnāni mama vaśyānyaśeṣataḥ tathaiva gajaratnaṃ ca hṛtaṃ devendravāhanam
अर्थ
तीनों लोकों के समस्त उत्तम रत्न पूर्णतः मेरे वश में हैं; और वैसे ही देवराज का वाहन हाथी-रत्न भी छीन लिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.60 का अर्थ क्या है?▼
तीनों लोकों के समस्त उत्तम रत्न पूर्णतः मेरे वश में हैं; और वैसे ही देवराज का वाहन हाथी-रत्न भी छीन लिया गया है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 60वाँ श्लोक है।