अध्याय 5, श्लोक 1
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादॐ क्लीं ऋषिरुवाच पुरा शुम्भनिशुम्भाभ्यामसुराभ्यां शचीपतेः । त्रैलोक्यं यज्ञभागाश्च हृता मदबलाश्रयात् ॥
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लिप्यंतरण
oṃ klīṃ ṛṣiruvāca purā śumbhaniśumbhābhyāmasurābhyāṃ śacīpateḥ trailokyaṃ yajñabhāgāśca hṛtā madabalāśrayāt
अर्थ
(ॐ क्लीं। ऋषि बोले —) प्राचीन काल में शुम्भ और निशुम्भ नामक दो असुरों ने अपने मद और बल के आश्रय से तीनों लोक तथा इन्द्र (शचीपति) के यज्ञभाग छीन लिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.1 का अर्थ क्या है?▼
(ॐ क्लीं। ऋषि बोले —) प्राचीन काल में शुम्भ और निशुम्भ नामक दो असुरों ने अपने मद और बल के आश्रय से तीनों लोक तथा इन्द्र (शचीपति) के यज्ञभाग छीन लिए।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 1वाँ श्लोक है।