अध्याय 5, श्लोक 33
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादइन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या । भूतेषु सततं तस्यै व्याप्त्यै देव्यै नमो नमः ॥
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लिप्यंतरण
indriyāṇāmadhiṣṭhātrī bhūtānāṃ cākhileṣu yā bhūteṣu satataṃ tasyai vyāptyai devyai namo namaḥ
अर्थ
जो देवी समस्त प्राणियों की इन्द्रियों की अधिष्ठात्री हैं और सम्पूर्ण भूतों में निरन्तर व्याप्त रहने वाली हैं, उस व्याप्ति-रूपा देवी को नमस्कार-नमस्कार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.33 का अर्थ क्या है?▼
जो देवी समस्त प्राणियों की इन्द्रियों की अधिष्ठात्री हैं और सम्पूर्ण भूतों में निरन्तर व्याप्त रहने वाली हैं, उस व्याप्ति-रूपा देवी को नमस्कार-नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 33वाँ श्लोक है।