अध्याय 5, श्लोक 32
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादया देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
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लिप्यंतरण
yā devī sarvabhūteṣu bhrāntirūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ
अर्थ
जो देवी समस्त प्राणियों में भ्रान्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.32 का अर्थ क्या है?▼
जो देवी समस्त प्राणियों में भ्रान्ति रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 32वाँ श्लोक है।