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दुर्गा सप्तशती 5.31

अध्याय 5, श्लोक 31

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

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लिप्यंतरण

yā devī sarvabhūteṣu mātṛrūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थ

जो देवी समस्त प्राणियों में मातृ (माता) रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.31 का अर्थ क्या है?
जो देवी समस्त प्राणियों में मातृ (माता) रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 31वाँ श्लोक है।