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दुर्गा सप्तशती 5.65

अध्याय 5, श्लोक 65

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

परमैश्वर्यमतुलं प्राप्स्यसे मत्परिग्रहात् एतद्बुद्ध्या समालोच्य मत्परिग्रहतां व्रज

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लिप्यंतरण

paramaiśvaryamatulaṃ prāpsyase matparigrahāt etadbuddhyā samālocya matparigrahatāṃ vraja

अर्थ

मेरे ग्रहण करने से आप अतुलनीय परम ऐश्वर्य पाएँगी। इसे बुद्धि से विचारकर मेरी स्वीकृति में आइए।"'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.65 का अर्थ क्या है?
मेरे ग्रहण करने से आप अतुलनीय परम ऐश्वर्य पाएँगी। इसे बुद्धि से विचारकर मेरी स्वीकृति में आइए।"'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 65वाँ श्लोक है।