अध्याय 5, श्लोक 64
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादमां वा ममानुजं वापि निशुम्भमुरुविक्रमम् । भज त्वं चञ्चलापाङ्गि रत्नभूतासि वै यतः ॥
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लिप्यंतरण
māṃ vā mamānujaṃ vāpi niśumbhamuruvikramam bhaja tvaṃ cañcalāpāṅgi ratnabhūtāsi vai yataḥ
अर्थ
हे चंचल कटाक्ष वाली! आप मुझे अथवा मेरे महापराक्रमी छोटे भाई निशुम्भ को भजिए, क्योंकि आप निश्चय ही रत्न-स्वरूपा हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.64 का अर्थ क्या है?▼
हे चंचल कटाक्ष वाली! आप मुझे अथवा मेरे महापराक्रमी छोटे भाई निशुम्भ को भजिए, क्योंकि आप निश्चय ही रत्न-स्वरूपा हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 64वाँ श्लोक है।