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दुर्गा सप्तशती 5.63

अध्याय 5, श्लोक 63

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

स्त्रीरत्नभूतां त्वां देवि लोके मन्यामहे वयम् सा त्वमस्मानुपागच्छ यतो रत्नभुजो वयम्

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लिप्यंतरण

strīratnabhūtāṃ tvāṃ devi loke manyāmahe vayam sā tvamasmānupāgaccha yato ratnabhujo vayam

अर्थ

हे देवी! हम आपको संसार में स्त्री-रत्न मानते हैं; अतः आप हमारे पास आ जाइए, क्योंकि हम रत्नों के भोक्ता हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.63 का अर्थ क्या है?
हे देवी! हम आपको संसार में स्त्री-रत्न मानते हैं; अतः आप हमारे पास आ जाइए, क्योंकि हम रत्नों के भोक्ता हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 63वाँ श्लोक है।