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दुर्गा सप्तशती 5.62

अध्याय 5, श्लोक 62

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

यानि चान्यानि देवेषु गन्धर्वेषूरगेषु रत्नभूतानि भूतानि तानि मय्येव शोभने

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लिप्यंतरण

yāni cānyāni deveṣu gandharveṣūrageṣu ca ratnabhūtāni bhūtāni tāni mayyeva śobhane

अर्थ

और देवताओं, गन्धर्वों तथा नागों में जो अन्य रत्न-स्वरूप वस्तुएँ थीं, हे शोभने! वे भी मुझ में ही हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.62 का अर्थ क्या है?
और देवताओं, गन्धर्वों तथा नागों में जो अन्य रत्न-स्वरूप वस्तुएँ थीं, हे शोभने! वे भी मुझ में ही हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 62वाँ श्लोक है।