अध्याय 5, श्लोक 66
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादऋषिरुवाच इत्युक्ता सा तदा देवी गम्भीरान्तःस्मिता जगौ । दुर्गा भगवती भद्रा ययेदं धार्यते जगत् ॥
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लिप्यंतरण
ṛṣiruvāca ityuktā sā tadā devī gambhīrāntaḥsmitā jagau durgā bhagavatī bhadrā yayedaṃ dhāryate jagat
अर्थ
(ऋषि बोले —) इस प्रकार कहे जाने पर तब वे देवी — दुर्गा, भगवती, भद्रा, जिनसे यह जगत् धारण किया जाता है — गम्भीर अन्तर्हास के साथ बोलीं:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.66 का अर्थ क्या है?▼
(ऋषि बोले —) इस प्रकार कहे जाने पर तब वे देवी — दुर्गा, भगवती, भद्रा, जिनसे यह जगत् धारण किया जाता है — गम्भीर अन्तर्हास के साथ बोलीं:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 66वाँ श्लोक है।