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दुर्गा सप्तशती 5.67

अध्याय 5, श्लोक 67

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

देव्युवाच सत्यमुक्तं त्वया नात्र मिथ्या किञ्चित्त्वयोदितम् त्रैलोक्याधिपतिः शुम्भो निशुम्भश्चापि तादृशः

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लिप्यंतरण

devyuvāca satyamuktaṃ tvayā nātra mithyā kiñcittvayoditam trailokyādhipatiḥ śumbho niśumbhaścāpi tādṛśaḥ

अर्थ

(देवी बोलीं —) 'तुमने सत्य कहा, इसमें तुमने कुछ भी असत्य नहीं कहा। शुम्भ सचमुच त्रैलोक्य का अधिपति है, और वैसा ही निशुम्भ भी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.67 का अर्थ क्या है?
(देवी बोलीं —) 'तुमने सत्य कहा, इसमें तुमने कुछ भी असत्य नहीं कहा। शुम्भ सचमुच त्रैलोक्य का अधिपति है, और वैसा ही निशुम्भ भी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 67वाँ श्लोक है।