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दुर्गा सप्तशती 5.68

अध्याय 5, श्लोक 68

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

किं त्वत्र यत्प्रतिज्ञातं मिथ्या तत्क्रियते कथम् श्रूयतामल्पबुद्धित्वात्प्रतिज्ञा या कृता पुरा

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लिप्यंतरण

kiṃ tvatra yatpratijñātaṃ mithyā tatkriyate katham śrūyatāmalpabuddhitvātpratijñā yā kṛtā purā

अर्थ

किन्तु इस विषय में जो प्रतिज्ञा की गई है, वह मिथ्या कैसे की जाए? अल्पबुद्धिवश पहले मैंने जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सुनो:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.68 का अर्थ क्या है?
किन्तु इस विषय में जो प्रतिज्ञा की गई है, वह मिथ्या कैसे की जाए? अल्पबुद्धिवश पहले मैंने जो प्रतिज्ञा की थी, उसे सुनो:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 68वाँ श्लोक है।