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दुर्गा सप्तशती 5.49

अध्याय 5, श्लोक 49

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

निधिरेष महापद्मः समानीतो धनेश्वरात् किञ्जल्किनीं ददौ चाब्धिर्मालामम्लानपङ्कजाम्

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लिप्यंतरण

nidhireṣa mahāpadmaḥ samānīto dhaneśvarāt kiñjalkinīṃ dadau cābdhirmālāmamlānapaṅkajām

अर्थ

यह महापद्म नामक निधि धनपति कुबेर से लाई गई; और समुद्र ने कभी न मुरझाने वाले कमलों की किंजल्किनी माला दी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.49 का अर्थ क्या है?
यह महापद्म नामक निधि धनपति कुबेर से लाई गई; और समुद्र ने कभी न मुरझाने वाले कमलों की किंजल्किनी माला दी।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 49वाँ श्लोक है।