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दुर्गा सप्तशती 5.48

अध्याय 5, श्लोक 48

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

विमानं हंससंयुक्तमेतत्तिष्ठति तेऽङ्गणे रत्नभूतमिहानीतं यदासीद्वेधसोऽद्भुतम्

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लिप्यंतरण

vimānaṃ haṃsasaṃyuktametattiṣṭhati te'ṅgaṇe ratnabhūtamihānītaṃ yadāsīdvedhaso'dbhutam

अर्थ

यह हंसों से जुता हुआ अद्भुत विमान, जो ब्रह्मा का रत्न था, यहाँ लाया जाकर आपके आँगन में खड़ा है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.48 का अर्थ क्या है?
यह हंसों से जुता हुआ अद्भुत विमान, जो ब्रह्मा का रत्न था, यहाँ लाया जाकर आपके आँगन में खड़ा है।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 48वाँ श्लोक है।