अध्याय 5, श्लोक 47
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादऐरावतः समानीतो गजरत्नं पुरन्दरात् । पारिजाततरुश्चायं तथैवोच्चैःश्रवा हयः ॥
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लिप्यंतरण
airāvataḥ samānīto gajaratnaṃ purandarāt pārijātataruścāyaṃ tathaivoccaiḥśravā hayaḥ
अर्थ
हाथियों में रत्न ऐरावत इन्द्र से लाया गया, यह पारिजात वृक्ष भी, और वैसे ही उच्चैःश्रवा घोड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.47 का अर्थ क्या है?▼
हाथियों में रत्न ऐरावत इन्द्र से लाया गया, यह पारिजात वृक्ष भी, और वैसे ही उच्चैःश्रवा घोड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 47वाँ श्लोक है।