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दुर्गा सप्तशती 5.46

अध्याय 5, श्लोक 46

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

यानि रत्नानि मणयो गजाश्वादीनि वै प्रभो त्रैलोक्ये तु समस्तानि साम्प्रतं भान्ति ते गृहे

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लिप्यंतरण

yāni ratnāni maṇayo gajāśvādīni vai prabho trailokye tu samastāni sāmprataṃ bhānti te gṛhe

अर्थ

हे प्रभो! तीनों लोकों में जो भी रत्न, मणियाँ, हाथी-घोड़े आदि हैं, वे सब इस समय आपके घर में सुशोभित हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.46 का अर्थ क्या है?
हे प्रभो! तीनों लोकों में जो भी रत्न, मणियाँ, हाथी-घोड़े आदि हैं, वे सब इस समय आपके घर में सुशोभित हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 46वाँ श्लोक है।