अध्याय 5, श्लोक 35
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादस्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया- त्तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता । करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः ॥
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लिप्यंतरण
stutā suraiḥ pūrvamabhīṣṭasaṃśrayā- ttathā surendreṇa dineṣu sevitā karotu sā naḥ śubhaheturīśvarī śubhāni bhadrāṇyabhihantu cāpadaḥ
अर्थ
जो पूर्वकाल में अभीष्ट की प्राप्ति के लिए देवताओं द्वारा स्तुति की गईं और इन्द्र द्वारा प्रतिदिन सेवित रहीं — वे कल्याण की हेतु ईश्वरी हमारा शुभ व मंगल करें और विपत्तियों का नाश करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.35 का अर्थ क्या है?▼
जो पूर्वकाल में अभीष्ट की प्राप्ति के लिए देवताओं द्वारा स्तुति की गईं और इन्द्र द्वारा प्रतिदिन सेवित रहीं — वे कल्याण की हेतु ईश्वरी हमारा शुभ व मंगल करें और विपत्तियों का नाश करें।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 35वाँ श्लोक है।