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दुर्गा सप्तशती 5.36

अध्याय 5, श्लोक 36

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै- रस्माभिरीशा सुरैर्नमस्यते या स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः

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लिप्यंतरण

yā sāmprataṃ coddhatadaityatāpitai- rasmābhirīśā ca surairnamasyate yā ca smṛtā tatkṣaṇameva hanti naḥ sarvāpado bhaktivinamramūrtibhiḥ

अर्थ

और जो ईश्वरी इस समय उद्धत दैत्यों से पीड़ित हम तथा भक्ति से विनम्र देवताओं द्वारा वन्दित हैं — जो स्मरण किए जाने पर उसी क्षण हमारी समस्त विपत्तियों का नाश कर देती हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.36 का अर्थ क्या है?
और जो ईश्वरी इस समय उद्धत दैत्यों से पीड़ित हम तथा भक्ति से विनम्र देवताओं द्वारा वन्दित हैं — जो स्मरण किए जाने पर उसी क्षण हमारी समस्त विपत्तियों का नाश कर देती हैं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 36वाँ श्लोक है।