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दुर्गा सप्तशती 5.37

अध्याय 5, श्लोक 37

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

ऋषिरुवाच एवं स्तवाभियुक्तानां देवानां तत्र पार्वती स्नातुमभ्याययौ तोये जाह्नव्या नृपनन्दन

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लिप्यंतरण

ṛṣiruvāca evaṃ stavābhiyuktānāṃ devānāṃ tatra pārvatī snātumabhyāyayau toye jāhnavyā nṛpanandana

अर्थ

(ऋषि बोले —) हे राजकुमार! जब देवता इस प्रकार स्तुति में लगे थे, तभी पार्वती वहाँ गंगा (जाह्नवी) के जल में स्नान करने आईं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.37 का अर्थ क्या है?
(ऋषि बोले —) हे राजकुमार! जब देवता इस प्रकार स्तुति में लगे थे, तभी पार्वती वहाँ गंगा (जाह्नवी) के जल में स्नान करने आईं।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 37वाँ श्लोक है।