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दुर्गा सप्तशती 5.38

अध्याय 5, श्लोक 38

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

साब्रवीत्तान् सुरान् सुभ्रूर्भवद्भिः स्तूयतेऽत्र का शरीरकोशतश्चास्याः समुद्भूताब्रवीच्छिवा

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लिप्यंतरण

sābravīttān surān subhrūrbhavadbhiḥ stūyate'tra kā śarīrakośataścāsyāḥ samudbhūtābravīcchivā

अर्थ

उन सुन्दर भौंहों वाली ने उन देवताओं से पूछा: 'यहाँ आप किसकी स्तुति कर रहे हैं?' तभी उन्हीं (पार्वती) के शरीर-कोश से प्रकट होकर शिवा (अम्बिका) बोलीं:

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.38 का अर्थ क्या है?
उन सुन्दर भौंहों वाली ने उन देवताओं से पूछा: 'यहाँ आप किसकी स्तुति कर रहे हैं?' तभी उन्हीं (पार्वती) के शरीर-कोश से प्रकट होकर शिवा (अम्बिका) बोलीं:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 38वाँ श्लोक है।