Mantra.Tips
दुर्गा सप्तशती 5.17

अध्याय 5, श्लोक 17

अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvādaदेव्या दूतसंवाद

या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ

लिप्यंतरण

yā devī sarvabhūteṣu chāyārūpeṇa saṃsthitā namastasyai namastasyai namastasyai namo namaḥ

अर्थ

जो देवी समस्त प्राणियों में छाया रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।

इस श्लोक को साझा करें
Share:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 5.17 का अर्थ क्या है?
जो देवी समस्त प्राणियों में छाया रूप से स्थित हैं, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, उन्हें नमस्कार, बार-बार नमस्कार।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 17वाँ श्लोक है।