अध्याय 5, श्लोक 76
अध्याय 5: Devyā Dūta Saṃvāda — देव्या दूतसंवादस त्वं गच्छ मयोक्तं ते यदेतत्सर्वमादृतः । तदाचक्ष्वासुरेन्द्राय स च युक्तं करोतु यत् ॥
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लिप्यंतरण
sa tvaṃ gaccha mayoktaṃ te yadetatsarvamādṛtaḥ tadācakṣvāsurendrāya sa ca yuktaṃ karotu yat
अर्थ
अतः तुम जाओ, और जो कुछ मैंने कहा है वह सब आदरपूर्वक असुरराज से कह दो; और वह जो उचित हो वही करे।'
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 5.76 का अर्थ क्या है?▼
अतः तुम जाओ, और जो कुछ मैंने कहा है वह सब आदरपूर्वक असुरराज से कह दो; और वह जो उचित हो वही करे।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 5 (Devyā Dūta Saṃvāda — देवी-दूत संवाद) का 76वाँ श्लोक है।