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दुर्गा सप्तशती 6.1

अध्याय 6, श्लोक 1

अध्याय 6: Dhūmralocana Vadhaधूम्रलोचनवध

ऋषिरुवाच इत्याकर्ण्य वचो देव्याः दूतोऽमर्षपूरितः समाचष्ट समागम्य दैत्यराजाय विस्तरात्

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लिप्यंतरण

oṃ ṛṣiruvāca ityākarṇya vaco devyāḥ sa dūto'marṣapūritaḥ samācaṣṭa samāgamya daityarājāya vistarāt

अर्थ

(ॐ। ऋषि बोले —) देवी के ये वचन सुनकर वह दूत क्रोध से भरकर लौटा और दैत्यराज के पास आकर विस्तार से सब कह सुनाया।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 6.1 का अर्थ क्या है?
(ॐ। ऋषि बोले —) देवी के ये वचन सुनकर वह दूत क्रोध से भरकर लौटा और दैत्यराज के पास आकर विस्तार से सब कह सुनाया।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 1वाँ श्लोक है।