अध्याय 6, श्लोक 2
अध्याय 6: Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचनवधतस्य दूतस्य तद्वाक्यमाकर्ण्यासुरराट् ततः । सक्रोधः प्राह दैत्यानामधिपं धूम्रलोचनम् ॥
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लिप्यंतरण
tasya dūtasya tadvākyamākarṇyāsurarāṭ tataḥ sakrodhaḥ prāha daityānāmadhipaṃ dhūmralocanam
अर्थ
अपने दूत के वे वचन सुनकर असुरराज ने तब क्रोधपूर्वक दैत्यों के अधिपति धूम्रलोचन से कहा:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 6.2 का अर्थ क्या है?▼
अपने दूत के वे वचन सुनकर असुरराज ने तब क्रोधपूर्वक दैत्यों के अधिपति धूम्रलोचन से कहा:
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 2वाँ श्लोक है।