अध्याय 6, श्लोक 3
अध्याय 6: Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचनवधहे धूम्रलोचनाशु त्वं स्वसैन्यपरिवारितः । तामानय बलाद्दुष्टां केशाकर्षणविह्वलाम् ॥
🔊 किसी भी शब्द को सुनने के लिए टैप करें — या पूरा श्लोक सुनने के लिए ▶ दबाएँ
लिप्यंतरण
he dhūmralocanāśu tvaṃ svasainyaparivāritaḥ tāmānaya balādduṣṭāṃ keśākarṣaṇavihvalām
अर्थ
'हे धूम्रलोचन! तुम शीघ्र अपनी सेना से घिरे हुए जाओ और उस दुष्टा को केश पकड़कर घसीटते हुए बलपूर्वक यहाँ ले आओ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दुर्गा सप्तशती 6.3 का अर्थ क्या है?▼
'हे धूम्रलोचन! तुम शीघ्र अपनी सेना से घिरे हुए जाओ और उस दुष्टा को केश पकड़कर घसीटते हुए बलपूर्वक यहाँ ले आओ।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?▼
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 3वाँ श्लोक है।