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दुर्गा सप्तशती 6.4

अध्याय 6, श्लोक 4

अध्याय 6: Dhūmralocana Vadhaधूम्रलोचनवध

तत्परित्राणदः कश्चिद्यदि वोत्तिष्ठतेऽपरः हन्तव्योऽमरो वापि यक्षो गन्धर्व एव वा

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लिप्यंतरण

tatparitrāṇadaḥ kaścidyadi vottiṣṭhate'paraḥ sa hantavyo'maro vāpi yakṣo gandharva eva vā

अर्थ

और यदि कोई अन्य उसकी रक्षा के लिए उठे, तो वह मार डाला जाए — चाहे वह देवता हो, यक्ष हो अथवा गन्धर्व ही क्यों न हो।'

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 6.4 का अर्थ क्या है?
और यदि कोई अन्य उसकी रक्षा के लिए उठे, तो वह मार डाला जाए — चाहे वह देवता हो, यक्ष हो अथवा गन्धर्व ही क्यों न हो।'
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 4वाँ श्लोक है।