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दुर्गा सप्तशती 6.5

अध्याय 6, श्लोक 5

अध्याय 6: Dhūmralocana Vadhaधूम्रलोचनवध

ऋषिरुवाच तेनाज्ञप्तस्ततः शीघ्रं दैत्यो धूम्रलोचनः वृतः षष्ट्या सहस्राणामसुराणां द्रुतं ययौ

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लिप्यंतरण

ṛṣiruvāca tenājñaptastataḥ śīghraṃ sa daityo dhūmralocanaḥ vṛtaḥ ṣaṣṭyā sahasrāṇāmasurāṇāṃ drutaṃ yayau

अर्थ

(ऋषि बोले —) इस प्रकार आज्ञा पाकर दैत्य धूम्रलोचन साठ हज़ार असुरों से घिरा हुआ शीघ्र ही चल पड़ा।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा सप्तशती 6.5 का अर्थ क्या है?
(ऋषि बोले —) इस प्रकार आज्ञा पाकर दैत्य धूम्रलोचन साठ हज़ार असुरों से घिरा हुआ शीघ्र ही चल पड़ा।
यह श्लोक दुर्गा सप्तशती के किस अध्याय का है?
यह श्री दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अध्याय 6 (Dhūmralocana Vadha — धूम्रलोचन वध) का 5वाँ श्लोक है।